Title - सत्य की तलाश है 
Type - Poem 
Poet - Piyush Joshi 


सत्य की तलाश है, 
फिर भी क्यों उदाश है, 
सत्य की तलाश से, 
बड़ा न कोई कर्म है, 
मनुष्यों के लिए तो ये,
सबसे बड़ा धर्म है,
क्या मुश्किल है इसे ढूँढना,
या डरता है तू सत्य से।

सूरज से आँख मिला कर देख,
कुछ नया दिख जाएगा, 
सूरज की रोशनी को देख, 
सत्य का पहला पढ़ाव पार हो जाएगा, 
चन्दा की आँखों में देख, 
कुछ तो जरूर बताएगा, 
चन्दा की चाँदनी को देख, 
खुद का अस्तित्व न होकर भी, 
चमकना जान जाएगा।